Wednesday, November 13, 2019
Home > Samachar > अपार समर्थन के बाद भी कन्हैया कैसे हार गये ।

अपार समर्थन के बाद भी कन्हैया कैसे हार गये ।

बज्म ए अहले कलम मुसरीघरारी समस्तीपुर के जनरल सेक्रेटरी असरार दानिश ने लोकसभा चुनाव के परिणाम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह परिणाम जनादेश नहीं बल्कि ईवीएम मशीन का फैसला है। इस चुनाव में ईवीएम मशीन में भारी गड़बड़ी की आशंका से इनकार किसी भी तौर नहीं किया जा सकता है। इस बात का प्रमाण बिहार में बेगूसराय की सीट है जहां डॉक्टर कन्हैया कुमार की महा सुनामी चल रही थी । हिंदू-मुस्लिम बुढ़े जवान औरत मर्द सारे एकजुट होकर डॉक्टर कन्हैया कुमार के समर्थन में खड़े थे। डॉ कन्हैया कुमार के समर्थन में पूरे भारत से बड़े बड़े लोगों ने सभाएं की । ऐसी स्थिति में कन्हैया का हार जाना क्या दर्शाता है ।


दूसरी ओर इस चुनाव परिणाम में महागठबंधन के कमजोर नेतृत्व का भी बड़ा योगदान है। महागठबंधन में सियासी सूझबूझ की भी बड़ी कमी रही। महागठबंधन में कई सियासी पार्टियों को नजरअंदाज कर दिया गया जो महागठबंधन के मकसद के खिलाफ अमल था। महागठबंधन का मकसद वोट बिखराव को रोकना था जिसमें यह पूरी तरह विफल रहा। जीएसटी , नोटबंदी , काला धन, 1500000 , बेरोजगारी , सरकारी तंत्र का दुरुपयोग , सुप्रीम कोर्ट के जजों का प्रेस कॉन्फ्रेंस, पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतों में बेतहाशा इजाफ से पूरे भारत की जनता भाजपा सरकार से बेहद नाराज थी इसके बावजूद चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलना बुद्धिजीवियों को आश्चर्यचकित और हैरान करता है। उपर्युक्त बातें असरार दानिश ने चुनाव परिणाम पर इज़हार ए खयाल  करते हुए कही।

( असरार दानिश )