Sunday, September 22, 2019
HINDI NEWS PORTAL
Home > Samachar > इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर का चुनावी घमासान ।

इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर का चुनावी घमासान ।

6 जनवरी को इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर का चुनाव होने जा रहा है , मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग के भागीदारी वाले इस चुनाव की चर्चा अभी ज़ोरो पर है और सम्भ्रान्त मुस्लिम समाज में चुनावी मोसम शबाब पर है , इस्लाम के 1400 साल पूरा होने पर 1980 में पूरे विश्व के साथ भारत में शताब्दी उत्सव मनाया जा रहा था तो तत्कालीन प्रधानमंत्री स्रीमती इंदिरा गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग से विचार विमर्श के बाद इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर की स्थापना का फ़ैसला लिया था ।

एक अद्भुत इमारत में मुख्यालय वाली यह संसथान एक समाजिक व सांस्कृतिक प्रिश्ट्भुमि रखती है. लेकिन धार्मिक व राजनैतिक विवादो का भी केन्द्र रही है , 1981 में उस समय की प्रधानमंत्री ने एक कमेटी गठित की जिसके अध्यक्ष जस्टिस हिदायतुल्लाह थे , इस सोसायटी का पंजीकरण हुआ और पंजीकरण के स्मृति पत्र पर प्रारंभिक हस्ताक्षर कर्ताओ में हकीम अब्दुल हमीद , मुफ़्ती अतीकुर्रहमान , बदरुदीन तय्य्ब जी , बेगम आबिदा अहमद , सय्य्द एस शफ़ी , एस आसिफ़ अली, चोधरी मो आसिफ़ अली शामिल थे । 24 अगस्त 1984 को इसकी इमारत का शिलान्यास किया गया । इमारत दो आवासिय कमरे ,दो औडिटोरियम , कौफ़ी हाउस ,रेस्तरां , लाइब्रेरी व अन्य सुविधाओ से लैस है । इसका उद्घाटन श्रीमती सोनिया गांधी ने 12 जून 2006 को किया । इसमे अध्यक्ष उपाध्यक्ष और बोर्ड औफ़ ट्र्स्टी होता है , विभिन क्षेत्रों में उप्लब्धियों वाले गण मान्य लोग इसके सदस्य होते हैं ।

चुनाव से पहले आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है वर्तमान अध्यक्ष सिराजुदीन क़ुरैशी आरोपो के घेरे में हैं उनपर एक आरोप यह भी है कि वह सेंटर के पैसे का दुरुपयोग पी एम मोदी की किताब को उर्दु में छ्पवाने में कर रहे हैं । ऐसा कहा जा रहा है कि देश विदेश में भेजे जा रहे बैलेट पेपरो में गड़ बड़ी की जा रही है दिल्ली के बाहर भेजे जा रहे बैलेट पेपरों के पते आधे अधुरे हैं । बड़ा सवाल कल्चरल सेंटर की पहचान और अस्मिता का है , बोर्ड औफ़ ट्र्स्टी के उम्मीदवार जसीम मोहम्मद के अनुसार कल्चरल सेंटर मैरेज होम और क्लब बन कर रह गया है उपाध्यक्ष पद के एक उम्मीदवार का कहना है कि वर्तमान में सेंटर का कोई विज़न नही है , देश के मुसलमानों से संबंधित उनकी भलाई के लिए किसी भी तरह की कोई योजना नही चल रही है ।

पुर्व के दो चुनाव में भाग ले चुके होटल रीवर विव के एम डी व समाज सेवी कलीमुलहफ़ीज़ कहते हैं कि हमे धार्मिक व राजनैतिक मुद्दों पर उलझने के बजाय शिक्षा स्वास्थ प्रशिक्षण पर्यावरण पर ध्यान देना चाहिए । कल्चरल सेंटर से संबंधित इनकी किताब खाब जिसकी ताबीर अभी बाकी है का विमोचन अभी हाल ही में हुआ है। पुर्व मंत्री सलमान खुर्शीद के मुताबिक यहाँ होने वाली मीटिंग में सबको अपनी बात रखने का मौका नही मिलता और चुनाव में ही अपनी बात रखने का अवसर पाते हैं ।अध्यक्ष पद के उम्मीदवार पुर्व मंत्री आरिफ़ मुहम्मद खान ने अपील की है कि ऐसे उम्मीदवार को चुना जाना चाहिए जो मुस्लिम समाज का विकास कर सके ।

देखना यह है कि आगे आने वाले दिनों में मुस्लिम समुदाय के आशाओ और आकांक्षाओं की पूर्ति और उनके सपने साकार होते हैं या नहीं ।

( लेखक — शाहीन अहमद सिद्दीक़ी )

( लेखक के ये व्यक्तिगत विचार हैं और इन से ” तेवर न्यूज ” का सहमत होना आवश्यक नहीं , कोई और भी अपना पक्ष रखना चाहें तो उनका स्वागत है —संपादक )