Friday, May 24, 2019
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उत्तर प्रदेश में सपा + बसपा + लोकदल , 60 सीट तक जीत सकती है ?

लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के समापन के बाद ऐसा लग रहा है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में हताशा की स्थिति में है और यही कारण है कि भाजपाई नेताओं ने कांग्रेस पर हमला करने के साथ ही राजीव गांधी के लिये आपत्ति जनक बातें कही हैं । उत्तर प्रदेश में भाजपा को कांग्रेस से अधिक खतरा सपा + बसपा और लोकदल के गठबंधन से है मगर वो कांग्रेस पर बयान बाज़ी करके मतदाताओं को भटकाने का प्रयास कर रही है । कांग्रेस पहले से मज़बूत ज़रूर हुई है मगर इतनी भी मज़बूत नहीं हुई है कि वो उत्तर प्रदेश में भाजपा का खेल बिगाड़ सके ।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश में बड़ी कामयाबी मिली थी , वोट प्रतिशत में भी और सीटों की संख्या में भी भाजपा ने बाज़ी मारी थी मगर तब भाजपा के सामने कोई गठबंधन नहीं था , जब 2017 में लोकसभा के उप चुनाव हुए तो भाजपा ने उत्तर प्रदेश की सभी सीटें हार गई , जिस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की सीट भी थी । कारण दो थे , पहला भाजपा का खराब प्रदर्शन और विपक्ष का एक जुट होना । आज भी परिस्थिति यही है , भाजपा का कार्यकाल निराशा जनक और विपक्ष एक जुट हो कर चुनाव लड़ना है ।

भाजपा का वोट प्रतिशत लगातार नीचे आ रहा है और विपक्ष का बढ़ रहा है , सपा + बसपा और लोकदल के गठबंधन को जो वोट प्रतिशत मिल रहा है , वो भाजपा की प्रतिशत से बहुत अधिक है । इस आधार पर अगर देखा जाए तो इन पार्टियों को 60 के आस पास सीटें मिलती हुई नज़र आती है । पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को सरकार बनाने के लिए सबसे अधिक 73 सीटें उत्तर प्रदेश ही से मिली थी , दूसरा राज्य बिहार था जहां से 32 सीटें मिली थी , इस बार बिहार में भी भाजपा की हालत पतली है । इस बार बिहार में भाजपा गठबंधन को 20 सीट से कम मिलने की उमीद है , ऐसे में भाजपा दूसरी बार केन्द्र में सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पाऐगी और उस का गठबंधन 200 का आकड़ा भी पार नहीं कर पाऐगा ।