Monday, July 22, 2019
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एक शायरा — एक ग़ज़ल

नींद के साये ढलते रहे रात भर
ख़्वाब पलकों पे जलते रहे रात भर

एक लम्हा भी हम को सुकूं न मिला
ज़ख्म पहलू बदलते रहे रात भर

हम सफ़र और कोई हमारा न था
रास्ते साथ चलते रहे रात भर

प्यास का रक्स होटों पे जारी रहा
अश्क़ चश्मे उबलते रहे रात भर

एक मासूम बच्चे की सूरत ऐ ‘ नाज़ ‘
दिल के अरमां मचलते रहे रात भर

नाज़ ख़ान

मैनचेस्टर , इंग्लैंड

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