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क्या बैलेट पेपर से चुनाव संभव है ।

लोकसभा चुनाव सम्पन्न हो गया , परिणाम स्वरूप भाजपा केन्द्र में सरकार गठन की तयारी कर रही है और कुछ लोग सोशल मिडिया पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं । ये वो लोग हैं जिनका किसी पार्टी से कोई संबंध नहीं है लेकिन उन्हें संदेह है कि ई वी एम से होने वाले चुनाव में घपला संभव है । इस प्रकार के विचार रखने वाले लोगों की देश में बड़ी संख्या है । अब सवाल ये उठता है कि क्या इस प्रकार के विचार रखने वाले लोगों की संवेदनाओं को कौन समझेगा और इन का समर्थन कौन करेगा । क्या इस प्रकार का विचार रखने वाले लोगों की बातों में कोई तर्क है या ये बातें आधारहीन हैं ।



देश में अब तक जितने भी आंदोलन हुए हैं उनके पीछे कोई न कोई राजनितिक शक्ति रही है , आप अन्ना हज़ारे की आंदोलन को भी इस से अलग न समझें , इस आंदोलन के पीछे भी राजनितिक शक्ति रही है और खुल कर सब के सामने आ चुका है । अब सवाल उठता है कि फेस्बुक और सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल कर बगैर किसी राजनितिक पार्टी के समर्थन के क्या ये विचार आंदोलन का ले सकता है । मेरे विचार से नहीं ले सकता है , यहाँ दूसरे देश की मिसाल देना उचित नहीं है क्यूँ कि भारत में अभी ये संभव नहीं है । इस प्रकार अगर राजनितिक दल या दलों का सहयोग नहीं मिलता है तो ये विचार फेस्बुक और सोशल मीडिया में ही रह जाएगा और चाय की प्याली में तूफ़ान उठाने वाले लोग एक दिन खुद ही खामोश हो जाएंगे ।



बैलेट पेपर से चुनाव कराने में क्या चुनाव आयोग कोई आपत्ति है या ये संभव नहीं है , ये तभी पता चलेगा जब उस से बात की जाएगी और ये बात राजनितिक पार्टियां ही करेंगी । इस लिये राजनितिक पार्टियों के बिना ये संभव नहीं है । मायावती ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग ज़रूर रखी है लेकिन ये भी एक आलोचना से अधिक कुछ नहीं है । ई वी एम से चुनाव कराने से जिस किसी पार्टी को आपत्ति है उसे मिलकर चुनाव आयोग से बात करनी होगी , इस के सभी पक्षों को देखना होगा ।



इस के लिये लंबी लड़ाई लड़नी होगी, क्यों की देश में पुरी तरह ई वी एम स्थापित हो चुका है और जो स्थापित हो जाए , उसे आसानी से बदलना संभव नहीं होता । क्या इस प्रयोग के लिये राजनितिक पार्टियां तयार हैं और अगर नहीं हैं तो फिर फेस्बुक और सोशल मीडिया पर लिख कर समय बर्बाद करने से कुछ नहीं होने वाला है , इस से अच्छा है कि ये लोग देश की मुख्य धारा से जुड़ कर विकास की बातें और संभावनाओं की तलाश करें , जहाँ तक संभव हो ।

         (  डॉ  बिस्मिल आरिफ़ी )