Sunday, September 22, 2019
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जन जन ग़ालिब योजना ।

   
 

बचपन में हम पढ़ते थे कि भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसकी 80 प्रतिशत आबादी खेती करती है। पर अब लगता है भारत एक शाइरी प्रधान देश है जिसकी 99 प्रतिशत आबादी शाइरी और कविता करती है। भारत की मुख्य फ़स्लें रबी और खरीफ नहीं बल्कि ग़ज़लें और नज़्में हैं जो फेसबुक पर बोई जाती हैं और ट्विटर पर काटी जाती हैं और हर मंडी तक व्हाट्स ऐप के ज़रीये फैलाई जाती हैं । इन फ़सलों को उत्पादन के बाद मुशायरों और कवि सम्मेलनों की मंडियों में बेचा जाता है और सरकार ने इसके लिए कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित नहीं किया है , इसका कवि किसानों में व्यापक रोष है।

जहाँ कुछ कवि किसान अपनी हर कविता ५०००० रूपये प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं वही कुछ किसान 2 रूपये प्रति किलो भी नहीं कमाते। यह समाजवाद की मौलिक धारणा और समानता के सांविधानिक अधिकार के खिलाफ है। संविधान की धारा 14 में साफ़ लिखा है ‘इक्वलिटी इन पोएट्री ‘पर इसका पालन नहीं हो रहा। संविधान के डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स में भी लिखा है ‘the state shall take steps to make india a poetic state ‘and the preamble is very clear ‘we the people of india, having solemnly resolved to constitute india into a socialist ,secular democratic and POETIC republic .इसका पोएटिक शब्द संविधान के 42 वे फेसबूकिया संशोधन से जोड़ा गया था।

2019 के चुनावों को देखते हुए सारी पार्टियां न्यूनतम मुशायरा मूल्य को बढ़ाकर तीन चार गुना करने की बातें कर रही हैं। एक पार्टी ने तो यहाँ तक वादा कर दिया है कि अगर वो सत्ता में आये तो सरकार के काम काज की भाषा शाइरी होगी और विधानसभा ,लोकसभा के सारे बिल कविताओं में पास होंगे। जैसे ‘ हम संसद में लाये हैं बिल है तीन तलाक़,अब बीवी को छोड़ना बिलकुल नहीं मज़ाक़ ” इस पर कहा विपक्ष ने ये है हस्तक्षेप ,आपकी कथनी करनी में कितना भारी गैप ‘ उसी तरह जब कोई मुख्यमंत्री अफसरों का तबादला करे तो आदेश ऐसे होंगे ‘ कई जिलों के कलेक्टर लो बदले तत्काल–नए जिलों में जाकर ज्वाइन करो नए साल। हाई कोर्ट ,सुप्रीम कोर्ट की भाषा भी कविता होगी। तब लोग ये कहा करेंगे कि फलाना विदेश मंत्री ने यू एन ओ में पहली बार शाइरी में भाषण दिया। भारत के सबसे बड़े किसान आहत इन्दोरी ,तू मार विश्वास ,मुनव्वर नाना ,आदि हैं जिनकी सालाना उपज ही लाखों टन है और हर मंडी में उनकी फसलें धड़ल्ले से बिकती हैं।

ग्रीन रेवोलुशन ने खेतों की उपज बढ़ाई थी उसी तरह फेसबुक रेवोलुशन से शाइरी की उपज में सैकड़ों गुना वृद्धि हुई और भारत इस क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा काव्योत्पादक राष्ट्र बन गया है। बीच बीच में बाजार में कुछ नक़ली चीनी कवितायें आने से काफी हड़कंप भी मचता है और सरकार चीनी शाइरी पर कस्टम्स ड्यूटी चार गुना करने पर विचार कर रही है। भारत की जी डी पी में शाइरी का 90 प्रतिशत योगदान है। भारत २०२५ तक मंगल ग्रह तक भी शाइरी भेजने के लिए ‘ग़ज़लयान ‘ छोड़ने पर विचार कर रहा है। प्रधानमन्त्री ने ‘जन जन ग़ालिब योजना ‘ लांच कर दी है और हर व्यक्ति को मेक इन इंडिया के तहत ग़ालिब में बदल दिया जाएगा। उम्मीद है ये शाइरी प्रकाश के वेग से सारे सौर मंडल में जायेगी और छा जायेगी । जय हो , जय हो

                       ( अजय सहाब )