Saturday, October 19, 2019
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दिल्ली को संवारने वाली मुख्य मंत्री शीला दीक्षित नहीं रहीं ।

कांग्रेस पार्टी में अग्रिम पंक्ति की नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्य मंत्री शीला दीक्षित की हार्ट अटैक से 81 वर्ष की आयू में मौत हो गई । वो लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्य मंत्री रहीं और जो दिल्ली आज नज़र आ रही है , इस में उनका बड़ा योगदान है ।अगर ये कहा जाए कि दिल्ली में उनके कार्यकाल के बाद तरक़्क़ी की रफ़्तार थम सी गई है तो गलत नहीं होगा । एक बार फिर से शीला दीक्षित को दिल्ली लाया गया और मुख्य ज़िम्मेदारी दी गई और उन्होंने आते ही कांग्रेस पार्टी में गुट बाज़ी खत्म करने और पार्टी को मज़बूत करने का प्रयास शुरू कर दिया था , कांग्रेस के लिये महौल अनुकूल भी हो रहा था लेकिन मौत ने उन्हें इतनी फ़ुर्सत नहीं दी , अगर वो जीवित रहतीं तो एक बार फिर मुख्य मंत्री की उम्मीदवार होतीं ।

शीला दीक्षित बड़ी हंसमुख थीं , पत्रकारों के कठोर से कठोर सवालों के जवाब इतनी सहजता से देती थीं के लोग देखते रह जाते थे । आज के नेताओं के जैसे नहीं जो पत्रकारों पर हाथ तक उठा देते हैं । शीला दीक्षित मुस्लिम तंज़ीमों के लोगों से मिलने और उनके मसाइल समझने में बड़ी दिलचस्पी लेती थीं और उनसे जो बन पड़ता किया करती थीं । वो छोटे से छोटे पत्रकार से भी मिलने में हिचकिचाती नहीं थीं और न उनके सवालों से घबराती थीं । दिल्ली में रहते हुए मुझे भी कई बार उनसे मिलने और कुछ पूछने का अवसर मिला और हर बार उनको उसी अंदआज का पाया , जिस सादगी के लिये वो जानी जाती थीं । कांग्रेस पार्टी ने एक रत्न खो दिया है , जिस का कोई बदल नहीं है ।