Monday, July 22, 2019
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नवजोत सिंह जैसे लोग जब तक हैं , देश में प्रेम और भाईचारा क़ायम रहेगा ।

20 जून 2019 की बात है। मैं दिल्ली से कैराना के लिए वापस लौट रहा था। रास्ते में कुछ देर के लिए होटल अमरिक सुखदेव पर रुकना हुआ। यहां मैंने मगरिब की नमाज अदा की। यह नमाज़ मैंने होटल के पार्किंग ऐरिया में पढी। नमाज़ के दौरान मैंने नोट किया कि एक नौजवान मेरे सामने बहुत ही अलर्ट अंदाज में खडा है। मैंने तीन रकात पढ़ने के बाद जैसे ही अगली दो रकात के लिए नियत बांधी,यह नौजवान और भी ज्यादा अलर्ट हो गया।
इस दौरान एक गैर मुस्लिम ने भूलवश मेरे सामने से गुजरने की कोशिश की तो इस नौजवान ने उसे सख्ती से रोक दिया। मालूम हुआ कि यह नौजवान नमाज़ के सम्मान में इस लिए खडा था ताकि कोई व्यक्ति आगे से गुजर कर नमाज़ में व्यवधान न डाल सके। मेरे पूछने पर इस नौजवान ने अपना नाम नवजोत बताया। उसने बताया कि होटल के बाहरी हिस्से में उसकी कपड़े की दुकान है। नवजोत ने कहा कि कि आप नमाज़ पढ़ने के लिए मेरी दुकान में क्यों नहीं आ गये? नवजोत सिंह ने मुझे आमंत्रित किया कि भविष्य में जब भी आप को यहां नमाज़ पढनी हो तो आप मेरी दुकान पर आ जाया करें। मैंने देखा कि उनकी दुकान खाली पडी हूई थी और वह नमाज़ के अदब में खड़े थे।

इस घटना में एक बहुत बड़ी सीख है। देश में आम तौर पर मुसिलमो को बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अतिवादी लोग सामुदायिक नफरत फैलाने में लगे हैं। लेकिन इसी नफरत भरे माहौल में नवजोत जैसे युवक एक मुसलमान के साथ सम्मान का यह मामला करते हैं कि वे नमाजी के लिए अपनी दुकान तक अकेले छोड कर चले आते हैं। मैंने सोचा कि आखिर इस अंतर का कारण क्या है? कारण बिल्कुल स्पष्ट है। देश भर में मुस्लिमों की छवि लोगों की निगाह में एक राजनैतिक समुदाय से अधिक कुछ नहीं है। देश की एक बहुत बड़ी जनसंख्या को लगता है कि मुसलिम उनके राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। जो लगभग एक हजार वर्षों तक “उनके” देश पर राज करते रहे। लोगों का मानना है कि मुसलमानों ने देश का बटवारा कराया। वे सोचते हैं कि मुस्लिमों ने देश में आतंक फैलाया । इन नकारात्मक भावनाओं ने ने मुस्लिमों की जो छवि देश के नागरिकों में स्थापित की, इस छवि ने मुस्लिमों के सम्मान और प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुंचाया। नतीजा बिल्कुल स्पष्ट है कि मुस्लिमों और देश के दूसरे समुदायों के बीच दूरियां बढ गयीं।आप ध्यान से देखें तो ज्ञात होगा कि लोगों की निगाह में मुस्लिमों की छवि राजनैतिक मुद्दों से तय हूई है। राजनैतिक मुद्दों पर आधारित छवि ही सारे बिगाड़ की जड है।

होटल सुखदेव में मेरे साथ जो घटना घटी,उसमें एक नान मुस्लिम की निगाह में एक मुस्लिम की छवि एक आध्यात्मिक क्रिया अर्थात नमाज़ ने तय की न कि किसी राजनैतिक मुद्दे ने। यह आध्यात्मिक क्रिया इतनी शक्तिशाली थी कि एक व्यक्ति जो मुस्लिम भी नहीं था, वह भी अपनी दुकान छोड कर एक मुस्लिम की सुरक्षा के लिए आ गया। इससे मालूम हुआ कि मुस्लिम अगर अपनी राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी की छवि को छोड़कर अपनी इमेज अध्यात्म और इस्लाम पर आधारित करें तो उनके लिए मौका यहां तक है कि “पराये”समझे जाने वाले लोग भी उनकी सुरक्षा पर खड़े हो जायें।दुर्भाग्यवश हमने इस मौके से फायदा नहीं उठाया। हमें राजनैतिक हंगामे खड़े करने से तो पूरी दिलचस्पी रही लेकिन हमें इस सच्चाई की कभी खबर ही नहीं हूई कि अध्यात्म और चरित्र इस देश की सबसे बड़ी जरूरत है। अगर वे देश की इस आवश्यकता को पूरा कर दें तो खुदा के पसंदीदा तो वो बनेंगे ही साथ ही साथ देश में भी उनको सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होगी जिसकी वे हमेशा से शिकायत करते रहे हैं। आखिर ऐसा क्यों नहीं हुआ कि हम देशवासियों के बीच इस्लाम को अपनी चर्चा का विषय बनाते न कि तुच्छ राजनैतिक मुद्दों को। हम दुनिया को बताते कि पैगंबर मुहम्मद साहब पूरी मानवता के पैगंबर हैं न कि केवल मुस्लिमों के, हम लोगों को बताते कि कुरआन हर इंसान की किताब है ।इस पर मुसिलमो का कोई विशेषाधिकार नहीं ।क्यों ऐसा नहीं हुआ कि हमने कुरआन की शिक्षा से अपना और देशवासियों का चरित्र निर्माण किया होता। क्यों हमने पैगंबर मुहम्मद साहब की शिक्षाओं पर अमल करके इस देश को एक सुपर पावर नहीं बना दिया? यदि हमने ऐसा किया होता तो आज देश की तस्वीर भी कुछ और होती और मुस्लिमों की भी। समय आ गया है कि मुसलमान इस जिम्मेदारी का भार उठायें और कुरआन में मौजूद प्यार और इंसानियत की शिक्षा देश भर में फैलायें ताकि हमारा देश ऐक प्रेम देश बन सके। नफरत का जवाब मुहब्बत से दिया जाये, तो इससे बेहतर जवाब कुछ हो नहीं सकता। मिलजुल कर गलतफहमियां दूर हो, इससे बेहतर लडाई कुछ हो नहीं सकती।

        ( मुफ्ती अतहर शम्सी ) 

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