Monday, July 22, 2019
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नाज़ खान (लंदन) की गज़ल ।

वो जो नज़रें झुकाये बैठे हैं
मेरे दिल में समाये बैठे हैं

कुछ तो नज़रे करम इधर भी हो
हम भी महफ़िल में आये बैठे हैं

तुझको पाने की अब तमन्ना में
गम गले से लगाये बैठे हैं

बे वफ़ाओं से हम वफ़ा कर के
रोग दिल को लगाये बैठे हैं

जिन की खातिर है ” नाज़ ” अफसुर्दा
खुश वो गैरों में हाये बैठे हैं

 ( नाज़ खान , लंदन )