Sunday, September 22, 2019
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फिल्मी सितारों का प्रयोग राजनितिक पार्टियां केवल किसी को हड़ाने के लिये करती हैं ।

फिल्मी सितारों का राजनीतिक मैदान में उतरना और जीत कर संसद पहुंचना कोई नई बात नहीं , हर चुनाव में कुछ नये चेहरे नज़र आते हैं , किसी को हड़ाकर पार्टी की ओर से दिया हुआ टारगेट पूरा करते हैं और फिर पांच वर्ष तक कहीं नज़र नहीं आते । जनता क्या और जनता की समस्या क्या , ये तो संसद जाने का भी समय नहीं निकाल पाते , क्या ऐसे में इन्हें किसी भी पार्टी का उमीदवार बनाना सही है , ये जानते हुए कि इन में समाज सेवा की भावना हो तो भी इनके पास समय नहीं होता है कि वो जनता के लिए कुछ कर सकें , फिर भी इन्हें जनता क्यूँ जिताती है और बार बार धोखा खाती है ।

अमिताभ बच्चन से लेकर धर्मेंद्र तक की एक लंबी सूची है , जिन्होंने चुनाव जीता मगर उन्हें राजनिति पसंद नहीं आयी और फिर वो दूसरी बार नज़र नहीं आये । दक्षिण भारत में ये परंपरा कुछ अधिक फल फूल रहा है तो दक्षिण भारत में कुछ काम भी नज़र आता है लेकिन दूसरे राज्यों में अब तक मायूसी ही नज़र आती है । कुछ नेता कई बार जीते मगर उनकी सोच में कोई फ़र्क नहीं पड़ा , हेमामालिनी , जयप्रदा और कई अन्य नेता का नाम लिया जा सकता है । क्या उन्हें केवल इसी लिये जिताना ज़रुरी है कि वो फिल्मी सितारे हैं , ये सोचने का विषय है ।