Saturday, October 19, 2019
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बिहार में अल्पसंख्यक रोजगार ऋण एक मज़ाक़ ।

मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक रोजगार ऋण योजना बिहार में एक मजाक बनकर रह गया है । जिला समस्तीपुर में 2018 -19 के लिए जिला कल्याण विभाग में लगभग 550 आवेदन अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा जमा किया गया था । 2019 के शुरू में आवेदकों से उक्त कार्यालय में साक्षात्कार भी लिया गया और अब  जुलाई 2019 में एक वर्ष बाद  लगभग 350 आवेदकों का ऋण स्वीकृत कर जिला कल्याण कार्यालय में लिस्ट लगा दिया गया है । इनमें से 50 आवेदक भी विभाग द्वारा बताए जा रहे शर्तों को पूरा कर ऋण प्राप्त कर लें तो गनीमत है । 100000 तक के ऋण के लिए ऋणधारक द्वारा स्वयं  की गारंटी या किसी ऐसे व्यक्ति की गारंटी जिनके नाम या उनके माता पिता के नाम रेंट रशीद लगान या अन्य संबंधित दस्तावेज हो , से गारंटी बाउंड निष्पादित कराना अनिवार्य है ।

एक लाख से पाँच  लाख रुपया तक  के ऋण के लिए ऋणधारक को एक सरकारी/अर्ध सरकारी/ बैंक कर्मी / स्वायत्त निकाय के कर्मी (जिनकी सेवा कम से कम 5 वर्ष शेष हो) या किसी आयकर दाता की व्यक्तिगत गारंटी के समतुल्य अचल संपत्ति का इक्विटेबल मॉर्टगेज के साथ गारंटी बाउंड निष्पादित कराना अनिवार्य है । इन शर्तों को पूरा कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं। ज्ञात हो कि बैंक द्वारा आधार कार्ड एवं पैन कार्ड के आधार पर किसी भी जरूरतमंद को तीन लाख तक का ऋण आसानी से दिया जा रह है । ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक रोजगार योजना के तहत  इन शर्तों का लागू किया जाना क्या अल्पसंख्यकों के जज़्बात के साथ खेल या मज़ाक नहीं है । क्या इस योजना के तहत मुख्यमंत्री द्वारा अल्पसंख्यकों को बहलाने का काम नहीं किया जा रहा है ।

कोई सरकारी नौकरी पेशा आदमी क्यों किसी की गारंटी लेगा। इस संबंध में ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के जिला अध्यक्ष असरार दानिश ने कहा है कि मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक रोजगार ऋण योजना के तहत मुख्यमंत्री द्वारा अल्पसंख्यकों जिन में मुसलमानों की संख्या अधिक है को सब्जबाग दिखाया जा रहा है । आखिर इतनी कड़ी शर्त क्यों लगाई जा रही है जबकि प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के तहत ऋण प्राप्त करने में भी इतनी शर्ते या कागजी प्रक्रिया नहीं करनी पड़ती है । इन कठोर शर्तों को लागू किए जाने से माननीय  मुख्यमंत्री की नियत शक के घेरे में आ जाती है । यदि माननीय  मुख्यमंत्री वास्तव में अल्पसंख्यकों का कल्याण चाहते हैं और उन्हें स्वरोजगार बनाना चाहते हैं तो पूरे बिहार में इस रोजगार योजना के तहत जितने भी आवेदन प्राप्त हुए हैं सभी को स्वंय  द्वारा गारंटी बॉन्ड निष्पादन करा कर बेगैर किसी शर्त के ऋण प्रदान किया जाए ।


असरार दानिश