Saturday, October 19, 2019
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बिहार लोक सेवा आयोग ने मदरसों की डिग्री को किया नज़रअंदाज़ ।

बिहार मुस्लिम युवा मोर्चा के अध्यक्ष एवं दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग में अडवाइजर इंजीनियर उबैदुल्लाह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार लोक सेवा आयोग में मौलवियों को षड्यंत्र के तहत बहाली प्रकिर्या से दूर किये जाने के संबंध में पत्र लिखा और उनको आगाह किया कि इसबार बिहार राज्य शिक्षा विभाग के अंतर्गत बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों एवं अधीनस्थ अंगीभूत महाविद्यालयों में सहायक प्राचार्य उर्दू के पदों पर नियुक्ति की जा रही है परंतु शिक्षा विभाग के पत्रांक 754 दिनाँक-27/03/2019 के तहत मदरसा से उत्तीर्ण उम्मीदवारों को शून्य “0” अंक अधिभारित करते हुए मेघासुची तैयार की गयी है ।

जिसके कारण विभिन्न मदरसों से मौलवी/आलिम/ फ़ाज़िल की उपाधियों वाले अभ्यार्थी जिन्हें जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय एवं मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू ओपन यूनिवर्सिटी इत्यादि ने इंटरमीडिएट(10+2) के समकक्ष मान्यता प्रदान की है साक्षात्कार में भाग लेने से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि क्या इन अभ्यर्थियों ने P.hd तथा अन्य योग्यता जो प्राचार्य पद के लिए चाहये उन मानक को पूरा नही करते है? अइंजीनियर उबैदुल्लाह ने कहा कि लाखों की संख्यां में देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में इन मदरसों से डिग्री प्राप्त विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं तथा देश के विभिन्न संस्थानों में प्राचार्य एवं अन्य पदों पर कार्यरत हैं लेकिन बिहार सरकार को क्या हो गया है कि उन मौलवियों की डिग्री को मान्यता न दे कर मुस्लिम समाज के हाशहये के लोगों को साज़िश रच कर नियुक्ति प्रकिर्या से दूर कर दी है।

शिक्षा विभाग के बिहार सरकार के पत्रांक-754 दिनाँक-27/03/2019 में उल्लेखित किये गए अधिसूचना के भाग पर पुनर्विचार किया जाए ताकि साक्षात्कार में भाग लेने से वंचित हो रहे उम्मीदवारों को भी शामिल होने का मौका मिल सके।अंत मे उन्होंने मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि उपरोक्त विषय पर जल्द से जल्द आवश्यक क़दम उठाया जाए ताकि मदरसों से शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों का मनोबल न टूटे एवं उनका भी भविष्य उज्ज्वल हो सके तथा उपरोक्त संबंध में भविष्य में होने वाले विवादों से भी बचा जा सके।

Ubaidullah