Sunday, September 22, 2019
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मनोज झा राजद की नई पीढ़ी में सबसे क़ाबिल ।

पिछले कुछ वर्षों में राजद के बड़े बड़े नेता किनारे लग गए या लगा दिए गए , किनारे लगाना भी ज़रूरी था वरना लालू जी के बेटे और बेटी के लिए जगह कहाँ से निकलती । अब पार्टी में वही हैं और रहेंगे जो लालू के बेटे और बेटी को नेता मानेंगे । ये परिस्थिति अकेले राजद की नहीं कई पार्टियों की है , राजद से जनता कुछ और आशा रखती थी लेकिन वो भी उसी रास्ते पर चल निकली । अब राजद में मुद्दों पर बोलने वाले नेताओं की कमी है , इधर उधर की बात करने के लिए लालू जी के बेटों सहित भाड़ी संख्या बल है । ऐसे में मनोज झा को जब कभी संसद के बाहर या अंदर बोलते सुना या देखा तो लगा कि राजद अभी पूरी तरह अचछे नेताओं से ख़ाली नहीं हुई है ।

मनोज झा तो 2018 में राज्य सभा पहुंचे हैं , इस से पहले से वो प्रवक्ता के रूप में राजद के मंच से गंभीर समस्याओं से देश की जनता को अवगत कराते रहे हैं मगर देश की जनता ने उनकी नहीं सुनी और आज कल वो उन्हें समस्याओं से जूझ रही है । मनोज झा ने नोटबंदी और जीएसटी के समय भी सरकार के निर्णय की आलोचना की थी मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया , अब माब्लिंचिंग और कश्मीर के मुद्दों पर ज़ंबरदस्त ढंग से अपनी पार्टी का पक्ष रखा है । संसद में उनके द्वारा दिए गए जवाब को सुनकर सब लाजवाब थे, ये अलग बात है कि संख्या बल के कारण भाजपा जो बिल पास कराना चाहती थी, पास कराने में कामयाब हो गई ।

मनोज झा का देशी अंदाज और ज्ञान सब पर भारी पड़ता है और उनके सामने बड़े बड़े पार्टी प्रवक्ता छोटे नज़र आने लगते हैं , मनोज झा सहरसा, बिहार के रहने वाले हैं । दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं और जब किसी मुद्दे पर बोलने लगते हैं तो सुनने वालों को उनकी जानकारी का एहसास होता है और विरोधियों की बोलती बंद हो जाती है ।