Saturday, October 19, 2019
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मोहन भागवत और अमित शाह का बयान संविधान के ख़िलाफ़ — डॉ.मंज़ूर आलम


भारत एक सेक्युलर और संवैधानिक देश है , संविधान ने सभी देशवासियों को बिना किसी धार्मिक भेदभाव के समान अधिकार दिए हैं , फिर भी कुछ लोग सत्ता मिल जाने के बाद देश में धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा दे रहे हैं और संविधान की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं । इन विचार को आल इंडिया मिल्ली काउंसिल के महासचिव डॉ. मंज़ूर आलम प्रकट कर रहे थे। उनहों ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कहा कि भारत एक सेक्युलर देश है और शुरू से ही यहाँ कई समुदाय के लोग रहते आए हैं । संविधान में भी इसे सेक्युलर और संवैधानिक देश लिख गया है , इस लिए संविधान के ख़िलाफ़ के बोलने से देश का माहौल ख़राब होगा । उनहों ने पशिचम बंगाल की रैली में अमित शाह के बयान पर भी आपत्ति जताते हुए कहा है कि अमित शाह को सोचना चाहिए कि वो केवल किसी पार्टी के नेता ही नहीं देश के ग्रहमंत्री भी हैं  । उनहों ने एन आर सी पर जिस भाषा का प्रयोग किया है वो शर्मनाक है । हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई को देश में रहने का संवैधानिक अधिकार  हासिल है और किसी को ये अधिकार नहीं कि वो उनसे ये प्रमाण मांगे कि वो भारतीय हैं कि नहीं हैं  ।

डॉ. मंज़ूर आलम ने कहा कि एन आर सी और अन्य मुद्दों पर मुस्लिम के बीच ख़ौफ़ का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है  । शुरू में लव जिहाद और उसके बाद ममब्लिंचिंग के नाम पर मुस्लिम को डराया गया और अब एन आर सी व शहरी बिल का राग छेडा़ गया है जिस का मक़सद मुस्लिम में ख़ौफ़ पैदा करना है । असम एन आर सी का परिणाम हमारे सामने है , जिस में करोड़ों रुपये खर्च हुए और उस का सही नतीजा भी नहीं निकला । मोहन भागवत और अमित शाह देश के संविधान को सामने रखें और देश वासियों के बीच नफ़रत फैलाने वाले बयान से परहेज़ करें  । देश का संविधान बहुत मज़बूत है और इसी में देश के विकास का मंत्र है  । देश में जब जब नफ़रत फैलाई गयी है , देश का नुक़सान हुआ है । इस लिए सरकार में बैठे व अन्य लोग नफ़रत की चिंगारी न सुलगाऐं और देश के संविधान को महत्व दें  ।