Tuesday, June 18, 2019
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विश्व पुस्तक मेला में क्या रहा खास ।

पुस्तकें पढ़ने लिखने वालो का सच्चा साथी होती हैं , ये सृजन शीलता को विकसित करती हैं , इनमें व्यक्तित्व को निखारने की अद्भुत क्षमता होती है । इस संबंध में विश्व पुस्तक मेले को देखा जाए तो यह दिल्ली वालो के जीवन में अद्वितीय योगदान करती हैं और अतुल्य प्रभाव डालती है । इस बार का पुस्तक मेला भी कइ दृष्टि से अनुपम रहा । किताब मेले में दाखिल हों तो लगता है मानो पुस्तकों के समुद्र में आ गए , करीब 700 प्रकाशनो के इस महा संगम में 1300 स्टाल थे , सिर्फ हाल नम्बर 12 व 12 ए में 282 प्रकाशनो के स्टाल थे ।

    2018 में पुस्तक मेले का थीम पर्यावरण मुद्दा था , इस बार थीम दिव्यान्गो के नाम विश्व पुस्तक मेला रहा , जिसका उदेश्य औडियो मूक तन्य और ब्रेल पुस्तक के द्वारा खासमखास सीखने पर ज़ोर देना है , इसी के साथ यह उनके उपलब्धियो पर भी केन्द्रित है । पुस्तक मेले में अंतर्राष्ट्रीय दिव्यान्ग फ़िल्म फ़ेस्टिवल भी चल रहा था , जिसमें 27 देशों के 50 डौक्युमेन्ट्री फिल्म को दिखाया  गया है । इस बार शारजाह को विशिश्ट अतिथि बनाया गया है , उद्घाटन समारोह में थीम पर आधारित एन बी टी का कैलेन्डर जारी किया गया और शारजाह के शासक एच एच सुल्तान बिन मुहम्मद अल क़ासमी के पुस्तक बीबी फ़ातिमा और उनके पुत्र के हिन्दी और अंग्रेजी संसकरण का विमोचन किया गया । 

पुस्तक मेला कोलकाता पुस्तक मेला के बाद भारत का सबसे पुराना पुस्तक मेला है , प्रगति मैदान में लगने वाला ये विश्व पुस्तक मेला सबसे पहले 18 मार्च से 4 अप्रैल तक 1972 में लगा इसमें 200 प्रकाशनो के स्टाल थे , इसका उद्घाटन उस समय के राष्ट्रपति वी वी गिरी ने किया था । उर्दू प्रकाशन मेले में बहुत ही कम संख्या में लेकिन विशिश्ट व महत्व पूर्ण उपस्थिति दर्ज करा रहे थे , दिल्ली के अग्रिम प्रकाशनो में शामिल क़ौमी उर्दू कौंसिल , उर्दू एकेड्मी , रेख्ता और मर्क़ज़ी मकतबा इस्लामी के स्टालो पर काफ़ी भीर देखी गई ।

रेख्ता स्टाल से शारिक कैफ़ी की पुस्तक ” खिड़की तो मैं ने खोल ही ली ” नोमान शौक़ की किताब ” आखिरी इश्क़ सबसे पहले किया ‘ सबसे ज्यादा बिकी , उर्दू एकेडमी से आसारुसनादीद लेखको के मोनोग्रफ़ के स्टाल से उर्दू तन्क़ीद लोगत मर्क़ज़ी मकतबा इस्लामी के स्टाल से क़ुरान आदाबे ज़िन्दगी और तारीख ए इस्लाम सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तके है । क़ौमी उर्दू कौंसिल ने इस अवसर पर शनिवार को एक भव्य मुशायरा का आयोजन किया जिसमें देश के नामचीन शायरों ने अपने कलाम से नवाज़ा और भारी तादाद में मौजूद स्रोतागण ने उन्हे सराहा । दिल्ली वाले इस मेले से जुड़ी बातो को लंबे समय तक याद रखेंगे , वैसे भी दिल्ली मेलो ठेलो का शहर है यहां रहने वालो के संग संग ही होता है इनकी यादो का मेला ।

( लेखक : शाहीन अहमद सिद्दीक़ी )