Sunday, September 22, 2019
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सोनी सोरी को दी गई यतानाओं की चर्चा क्यूं नहीं ।

इस देश का समाजिक ताना बाना किस तरह का बुना गया है इसकी एक बानगी देखनी हो तो आप 17 अप्रैल 2019 के बाद भारत के इस खाये पिए अघाये सवर्ण और ” भारत माता की जय ब्राडं” देशभक्ति का नमूना देखिये । ये तब्क़ा अब मानवाधिकार की दुहाई दे रहा है। ये खाया पीया अघाया हुआ मध्यम वर्गीय तब्क़ा जो ऐरकण्डीशन हॉल में बैठा सीसीडे की कॉफी की चुस्कियां लेते पकिस्तान के लाहौर में तिरंगा और चाइना के बीजिंग में तिरंगा फहरा देने को भुजाएं फड़काता है और जो आज कल हर बात में आएगा तो मोदी ही टाइप बकैती करता हुआ क़हक़हा मार रहा है और ऐरकण्डीशन से बाहर निकल कर 80 रूपये लीटर पेट्रोल खरीदते हुए नेहरू को गाली दे रहा होता , अब जेल में दी जाने वाली यातनाओं पर टसुए ढलका रहा है ।

वो आतंकवाद की आरोपी प्रज्ञा सिंह के साथ जेल में हुई यातनाओं पर विमर्श कर रहा है और उसकी मुख़ालिफ़त करना चाहता है , हमें भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं
मानवाधिकार सब के लिए है ,चाहे वो आरोपी हो या पीड़ित,
लेकिन मानवाधिकारों की दुहाई देने वाले इस मध्यम वर्गीय तबक़े के दोगलेपन पर भी विमर्श होना चाहिए , प्रज्ञा सिंह को वैसी अमानवीय यातनाएं नहीं दी गईं जैसी सोनी सोरी को दी गईं । प्रज्ञा सिंह के गुप्तांगों में कील शीशे के टुकड़े और पत्थर नहीं ठूंसे गए और ये सब सोनी सोरी के साथ हुआ , प्रज्ञा सिंह को वैसी कोई यातना नहीं दी गयी जिस तरह का अमानवीय व्यवहार सोनी सोरी के साथ किया जाता रहा , प्रज्ञा सिंह के परिवार पर क्रैक डाउन नहीं किया गया जिस तरह सोनी सोरी के परिवार को धमकाया गया ।

जमानत मिलने के बाद भी प्रज्ञा सिंह सुरक्षित ही घूम रही है उस पर किसी तरह का हमला,एसिड अटैक नहीं हुआ लेकिन सोनी सोरी पर हुआ। सोनी सोरी के संबंध में लिखने को बहुत कुछ है लेकिन मूल सवाल ये है के जब सोनी सोरी के साथ इस तरह की यातनाओं की चर्चा पब्लिक डोमेन में आई तभी तब भी क्या इन मध्यम वर्गीय ” भारत माता की जय” छाप राष्ट्रवादियों की यही प्रतक्रिया थी ?? तब भी क्या एक वो एक आरोपी के लिए सुनिश्चित किये गए मानवाधिकारों की दुहाई दे रहे थे ?? या फिर
सोनी सोरी बेघर आदिवासियों के लिए इस देश में वाजिब हक़ मांगने वाली एक आदिवासी महिला है , इसलिए उसके साथ किये गए तमाम कुकर्म न्यायसंगत हैं ??

सोनी सोरी की लड़ाई इस पूंजीवादी मनुवादी सामंती कॉर्पोरेट से है जो जबरन जल जंगल ज़मीन पर अपना आधिपत्य स्थापित कर इस देश के प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे हैं और उनका विरोध करना देशद्रोह है । इसलिए सोनी सोरी के साथ किया गया बलत्कार देशभक्ति से ओत प्रोत माना जाएगा ?? सोनी सोरी के गुप्तांगों में लोहे की कील ठूंसने वाला शीशे के टुकड़े डालने वाला और यौन शोषन करने वाला अधिकारी अंकित गर्ग देशभक्त है , इसलिए भाजपा की सरकार ने उसे 26 जनवरी 2012 को गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया था और आतंक के नेटवर्क का पर्दाफ़ाश करने वाला एक जांबाज़ अधिकारी शहीद हेमंत करकरे को भाजपाई गुंडों के बाद इस देश की लोकसभा स्पीकर के पद पर बैठे हुए लोग लगातार अपमानित करेंगे क्यूंकी उस शहीद हेमंत करकरे ने तथकथित हिन्दुओं को दबोचा था , और हिन्दू हित एवं सम्मान का स्वयंभू टेंडर भाजपाइयों के पास है ??

वास्तव में समस्या ये है के ये खाया पीया अघाया भारत माता की जय ब्रांड माध्यम वर्गीय देशभक्त तब्क़ा अपने विवेक से कम और वर्तमान माहौल से ज़्यादा संचालित होता है। गॉसिप को ईश्वरीय सत्य मानने वाला ये तब्क़ा जाती अस्पृश्यता,जैसी घृणित सोच और अन्धविश्वास के चपेट में आकंठ तक डूबा हुआ है इसलिए फासिस्ट सायबर सेल के फ़र्ज़ी माल की खपत इसी तबक़े के दरमियान ज़्यादा होती है , और यही वो मूल कारण है के ये सोनी सोरी को मीडिया स्पोंसर्ड कहानियों के आधार पर नक्सली और कन्हैया उमर ख़ालिद और शहला जैसे युवाओं को टुकड़े टुकड़े गैंग मानता है लेकिन फ़र्ज़ी साध्वी में उसे झांसी की रानी नज़र आती है। उस भारत माता में सोनी सोरी या आतंकवाद के झूठे आरोप में दस दस साल जेल में रह कर निर्दोष साबित होने वाले किसी मुस्लिम युवा की कोई जगह नहीं है । क्यूंकी वहाँ साध्वी प्रज्ञा जैसी फ़र्ज़ी साध्वी या बंजारा अय्यर आमीन जैसे आपराधिक मानसिकता के पुलिस वाले हैं या फिर किसी आठ साल की मासूम आसिफ़ा का बलत्कार करने वाले धर्म रक्षक !!!!

                फ़र्रह शकेब  

              (  नई दिल्ली ) 

( लेखक के ये व्यक्तिगत विचार हैं और इन से सहमत होना ज़रुरी नहीं – संपादक )