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उर्दू भाषा की तरक़्क़ी के लिए केन्द्र सरकार की सकरात्मक पहल ।

राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद के डायरेक्टर डॉ. शैख़ अक़ील अहमद ने कहा कि केन्द्र सरकार उर्दू भाषा की तरक़्क़ी के लिए कोशिश कर रही है । इस का प्रमाण ये है कि परिषद का आरंभिक बजट 84 लाख था जो अटल बिहारी वाजपयी की सरकार में करोड़ो तक पहुंच गया । उन्ही की सरकार में परिषद की नई बिल्डिंग बनी । 2009 – 2014 में परिषद का वार्षिक बजट 176-48 करोड़ था जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में बढ़ कर 2014 – 2019 में 332-16 करोड़ हो गया है । इस प्रकार इस सरकार में 88% की बढ़ोतरी हुईं है ।

डॉ. शैख़ अक़ील अहमद ने ये भी कहा कि परिषद की स्थापना का जो मक़सद है उसे पूरा करने की भरपूर कोशिश की जा रही है । उन्होंने ये भी कहा कि बहुत जल्द उर्दू भाषा की तरक़्क़ी के लिए नई स्कीमें शुरु की जाएंगी । खुशी की बात है की उर्दू की बहुत सी संस्थाएं और उर्दू एकेडमियां काउंसिल से मिलकर उर्दू भाषा की तरक़्क़ी के लिए काम करना चाहती हैं , जल्द ही इस सिलसिले में उर्दू भाषा की तरक़्क़ी के लिए बेहतर फ़ैसला लिया जायेगा ।