Thursday, February 20, 2020
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एनआरसी, सीएए और एनपीआर के विरोध में महिलाओ द्वारा मुंगेर में अनिश्चितकालीन धरना।

एनआरसी, सीएए और एनपीआर के विरोध में स्थानीय अब्दुल हमीद चौक पर महिलाओ द्वारा जारी अनिश्चितकालीन धरने का आज चौथा दिन है और इनके हौसले पस्त नही हैं। इन महिलाओं की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और ये जहां एक तरफ़ सम्प्रदायिक शक्तियों से लोहा ले रही हैं, वहीं दूसरी तरफ़ इस अहंकारी दम्भी सत्ता की आंख में आंख डाल कर सवाल भी कर रही हैं कि क्या इस देश की जनता ने तुम्हें इस लिए चुना था कि तुम ख़ुद को चुनने वालों से एक दिन ये सवाल करोगे के तुम भारत के नागरिक हो या नही। यहां उपस्थित महिलाओं का कहना है कि वो यहां अपने निजी लाभ के लिए नही आती हैं बल्कि ये समस्त राष्ट्रीय हित के पक्ष में है और यही उनका वास्तविक उद्देश्य है। धरने पर बैठी महिलाओ का कहना है वो अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग करते हुए धरने के माध्यम से सत्ता से ले कर राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट तक अपनी बात पहुंचा रही हैं।

धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है के आज शाहीन बाग़ का आंदोलन पूरे देश मे जनवादी आवाज़ों का आइकॉन बन चुका है और पिछले डेढ़ महीने में पूरे देश मे सैकड़ों शहरो क़स्बों में शाहिन बाग़ बन चुका है। धरने पर बैठी इन महिलाओं का कहना है के हम केवल नए नागरिकता कानून के विरोध में ही नही बल्कि देश की अन्य मौलिक समस्याएं भी हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रदर्शनकारी महिलाओ का कहना है के देश बाबा साहेब के सम्विधान से चलेगा न की नागपुर में बैठे लोगों की विभाजनकारी मानसिकता से इस देश की नीतियां बनाई जाएंगी। सत्ता में बैठे लोग देश की मौलिक समस्याओं से जनता का ध्यान हटा कर पूंजीपतियों को ख़ज़ाना लूटने का सुअवसर प्रदान करना चाहते हैं और इसी क्रम में।लगातार सरकारी उपक्रमों के निजीकरण की तरफ़ देश को ले जाने का प्रयास चल रहा है जिसे सारा देश समझ रहा है।

धरने में शामिल महिलाओ का कहना है के आज देश भर में औरतों ने सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है और कंपकपाती ठंड में बारिश में आउट मौसम को चुनौती देते हुए रात भर सड़क पर हैं और हम मुंगेर की महिलाएं भी उनके साथ हर क़दम पर खड़े हैं और हम तब तक डटे रहेंगे जब तक सरकार ये कानून वापस नही लेती है। मोदी जी मन की बात करते हैं तो उनको दूसरों के मन की बात सुन्नी भी चाहिए। मन की बात करना कोई बुरी बात नही हैं ज़रूर कीजिये लेकिन आज देश भर में सैकड़ों शाहिन बाग़ में जो लाखों महिलाएं बैठी हैं उनके मन की बात भी सुनिए और मोदी जी को समझना चाहिए के वन वे ट्रैफिक का नियम यातायात का होता है लोकतंत्र में पक्ष विपक्ष दोनों की आवाज़ होती है और दोनों को एक दूसरे की आवाज़ सुननी भी पड़ती है।

स्थानीय अब्दुल हमीद चौक पर आयोजित इस अनिश्चितकालीन धरने में स्थानीय युवाओं के इलावा शहर के दूसरे इलाक़ों से भी युवाओं की अच्छी ख़ासी भागिदारी हो रही है। ये युवा एक तरफ़ जहां सड़क पर यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने की ज़िम्मेदारी उठा रहे हैं तो वहीं प्रदर्शन में आने वाली महिलाओं के खाने पीने एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति में भी निरन्तर लगे हैं। मंच से बार बार ये उद्घोषणा हो रही है के यातायात में किसी भी तरह का असुविधा न हो इसका विशेष ध्यान रखा जाए। मंच के आसपास शहीद भगत सिंह, अशफ़ाक़ुल्लाह खां, बिस्मिल गांधी और बाबा साहेब की तस्वीरें भी लगी हैं। साथ ही साथ संविधान की प्रस्तावना भी लगाई गई है।