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क्या राहुल गांधी के त्याग से कांग्रेस को फायदा होगा ?

लोकसभा चुनाव में करारी हार से निराश हुए राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से स्तीफ़ा दे दिया और अपने फैसले पर डटे रहे । पार्टी कार्यकर्ता के मनाने के बाद भी नहीं माने और अब उनकी जगह नये अध्यक्ष के चुनने की कवायद शुरू हो गई है । कई नाम पर विचार विमर्श चल रहा है और लगता है कि जल्द ही कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिल जाएगा लेकिन क्या इस से कांग्रेस पार्टी में शक्ति आ जाएगी , क्या वो कांग्रेस में चल रही गुटबाज़ी को ख़त्म कर सब को साथ ला सकते हैं । खर्गे , शिंदे , शैलजा सहित कई नाम पर विचार किया जा रहा है , क्या इन में ऐसी खूबियां हैं कि वो ये करिश्मा कर सकते हैं ।

कांग्रेस का इतिहास बताता है कि पार्टी की कमान जब भी गांधी परिवार से अलग किसी को मिली है , पार्टी का नुकसान हुआ है और फिर से गांधी परिवार को आगे आ कर पार्टी को संभालना पड़ा है । क्या इस बार भी यही इतिहास दोहराया जाएगा या नया कुछ संभव है , अभी इस पर कुछ कहना समय पूर्व होगा । एक बात ये भी कही जा रही है कि इस प्रकार कांग्रेस को मझधार में छोड़ना राहुल गांधी का मैदान से भागना तो नहीं है लेकिन मेरा मानना है कि ये राहुल की सोची समझी राजनीतिक चाल है । वो चाहते हैं कि कांग्रेस के वो नेता जो खुद को कांग्रेस के बड़े नेता समझने लगे हैं , उन्हें भी मालूम हो कि जब कोई पार्टी के शीर्ष पर बेठा हो तो सब को साथ लेकर चलना और पार्टी को जीत के पास ले जाना कितना मुश्किल होता है ।