Wednesday, November 20, 2019
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जिग्नेश मेवानी की तलाश ।

एम वदूद साजिद

गुजरात के अहमदाबाद में एक ढाबे पर कल रात दो दलित युवकों को बेरहमी से पीटा गया । ढा़बे के मालिक और उसके परिवार ने जान से मारने की पूरी कोशिश की, लेकिन दोनों पीड़ित बच गए। गुजरात के दलित नेता जिगनेश मेवानी ने 11 घंटे पहले धमकी दी थी कि अगर इस ” लिंचिंग ” के अपराधियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे पूरे गुजरात में बंद की घोषणा करेंगे। जिगनेश ने यह भी कहा कि हम कायर नहीं हैं , हम संविधान का सम्मान करते हैं । इस धमकी के बाद पुलिस समेत पूरी गुजरात सरकार सकते में आ गई। आरोपी के खिलाफ धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया है , धारा 307 जानबूझकर हत्या करने के प्रयास में लगाया जाता है ।

इस खबर को पढ़कर मेरे दिमाग में लिंचिंग के कितने दृश्य घूमने लगे , दादरी के मोहम्मद अख़लाक़ से लेकर झारखंड के तबरेज़ अंसारी तक, व्यापक दहशत के 69 भयावह दृश्य हमारी आँखों में आ गए । लेकिन ऐसी कोई घटना नहीं हुई जिसमें मुसलमानों के किसी राजनीतिक या धार्मिक नेता ने बंद करने की घोषणा की हो या कम से कम धमकी ही दी हो । फिर यह भी याद आया कि मोहम्मद अखलाक के हत्यारों को जमानत मिल गयी घऔर अन्य पीड़ितों के हत्यारों को फूल पहनाए गए । यहां तक ​​कि पहलू खान के खुले हत्यारों को भी छोड़ दिया गया और पहलू खान को खुद ही हत्या का दोषी बताया गया ।

ये सब हुआ लेकिन क्या कोई मुस्लिम ” जिग्नेश मेवाणी ” मैदान में आया ? क्या मुसलमानों को वास्तव में ” जिगनेश मेवानी ” की कमी है ? मुझे लगता है कि जितने मेवानी मुस्लिम समुदाय में हैं उतने किसी और समुदाय में नहीं हैं । ये नहीं देखें रहे हैं कि हर एक घंटे बाद अपीलें आ रही हैं ।” बाबरी मस्जिद पर कोई फैसला आऐ । मुसलमान ख़ुशी न मनाऐं , शोक मत करें , मदरसा के छात्र की बाहर न निकलें । इस प्रकार निर्देशों की एक लंबी सूची है, कहाँ तक बताया जाए। क्या हम इस प्रकार के अन्य कामों को छोड़कर, मुसलमानों में एक जिग्नेश मेवानी को तलाश करें ।