Sunday, January 26, 2020
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तीन तलाक़ बिल पेश करने के लिये भाजपा इतनी उतावली क्यूं है ?

साहित्यिक संस्था बज्म ए अहल ए कलम मुसरीघरारी , समस्तीपुर , बिहार के जनरल सेक्रेटरी असरार दानिश ने लोकसभा में तीन तलाक बिल पेश किए जाने पर शदीद रद्दे अमल का इजहार करते हुए कहा कि इस बिल से मुस्लिम खवातीन का किसी भी तरह का भला होने वाला नहीं है बल्के यह बिल मुस्लिम समाज को तबाह व बर्बाद करने के लिए लाया जा रहा है। यह बिल हमारे संवैधानिक अधिकार को छीनने की एक कोशिश है। मुस्लिम खवातीन की समस्याओं के अलावा भी हमारे देश में बहुत सारी गंभीर और चिंताजनक समस्याएं हैं। उन समस्याओं पर भारत सरकार की नजर आखिर क्यों नहीं जाती? तीन तलाक बिल मुसलमानों की मजहबी आजादी पर कड़ा प्रहार है जिसे मुसलमान किसी भी हालत में कबूल नहीं कर सकता। मजहबी मामले में किसी भी तरह की छेड़छाड़ मुसलमानों को कुबूल नहीं है ।

अगर औरतों की हालत के बारे में केंद्र सरकार सही मायने में फिक्र मंद है तो पहले भारत सरकार को उन दो करोड़ से ज्यादा औरतों के बारे में सोचना चाहिए जो भारत के विभिन्न शहरों में वेश्यावृत्ति में लिप्त है। यह औरतें जानवर से भी बदतर जिंदगी गुजारने पर मजबूर हैं। क्या इनकी भलाई या उत्थान के लिए पहले सोचा जाना जरूरी नहीं है? सिर्फ कानून बनाकर जुर्म को रोका नहीं जा सकता। क्या भारत में चोरी डकैती दंगा फसाद हत्या पर कानून नहीं है? कानून होते हुए भी इस तरह के जुर्म रोज हो रहे हैं। तीन तलाक की की कुरीतियों को कम या खत्म करने के लिए धार्मिक विद्वानों से सरकार को मिल बैठकर बात करनी चाहिए , विचार विमर्श करना चाहिए । किसी भी सामाजिक कुरीतियों को खत्म या कम करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता है । इस संबंध में भारत सरकार धार्मिक विद्वानों से सलाह मशविरा करते हुए जागरुकता अभियान का प्रारूप तैयार करे और उसे पूरी ताकत के साथ चलाएं ।