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नसीरुदीन शाह के दर्द का यथार्थ ।

जब बुलंद शहर में गाय के नाम पर हिंसक भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या कर दी तो पूरा देश सन्नाटे में आ गया और चिन्ता की लहर दौड़ गयी । भय शोक और क्रोध की भावना को सब ने महसूस किया , इसी संदर्भ में नसीरुदीन शाह विचार व्यक्त करने से अपने आप को नहीं रोक सके। उन्हों ने कहा कि आज गाय की जान से एक पुलिस इंस्पेक्टर की जान कम महत्वपूर्ण है । वो इस बात को लेकर चिंतित है कि अगर कल किसी हिंसक भीड़ ने उनके बच्चों को घेर कर उनका मज़हब पूछा तो वह उसका जवाब नहीं दे पाएंगे।

बस इसी बात को लेकर सांप्रदायिक तत्वो ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उनपर गद्दार होने के आरोप लगने लगे। पाकिस्तान जाने की सलाह दी जाने लगी । किसी ने यह कहना शुरू किया कि उनका व्यक्तित्व फ़िल्म सरफ़रोश में उनके किरदार गुलफ़ाम हसन के अनुरूप है जिसमें उन्होंने एक पाकिस्तानी एजेन्ट का किरदार निभाया है । भाजपा नेता रमेश बिधुरी ने कहा कि शाह अपने बच्चों के साथ पाकिस्तान में जा कर बस जायें , राकेश सिन्हा जो भाजपा के राज्य सभा सदस्य है ने इसे देश को बदनाम करने वाला वक्तव्य बताया और कहा कि यह उनकी नीच सोच है । सम्बित पात्रा ने इसे पी आर स्टन्ट बताया , आम आदमी पार्टी नेता कपिल मिश्रा ने नसीरुदीन शाह से सवाल किया कि उन्होंने सिक्खो के खिलाफ दंगे और कशमीरी पंडितों को कश्मीर से निकाले जाने के खिलाफ आवाज़ क्यों नहीं उठाया ।

बावेला यहीं तक नहीं रुका बल्कि शाह के लिए पाकिस्तान का टिकट भी खरीदा गया , सवाल ये है कि अगर कोई ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाता है तो उस का इस प्रकार वीर विरोध होना चाहिए ? इस प्रकार के आरोप लगाने चाहिए , उसे देश से निकाला जाना चाहिए या हमे सिर जोड़ कर बैठना चहिए और मिल जुलकर सांप्रदायिकता के इस विकराल रूप का जो हिंसक भीड़ के रूप में देश के सामने है का कोई निदान तलाश करना चाहिए । शान्ति में ही विकास है इसलिए हमे शान्ति स्थापित करने का प्रयास करना होगा । नसीरूदीन शाह ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मैं डरा नहीं हू बल्कि गुस्से में हूं ।ज़हर इतना फैल चुका है कि नफ़रत के जिन को बोतल में बन्द करना मुश्किल है , ज़रूरत इस बात की है कि सत्ता में शामिल लोग देश मे कानून व्यवस्था लागू करने में सन्शय में न पड़े सत्ता आज है कल नहीं लेकिन देश की गरिमा सर्वोपरी है । भारत के बाहर की दुनिया में भारत की छबि बहुत धूमिल हो रही है । समस्त देशवासी जागरूक हों और अमन चैन का माहौल बनाने का प्रयास करें , क्यूंकि इसी में सब सुख है ।

शाहीन अहमद सिद्दीक़ी




   ( लेखक के ये व्यक्तिगत विचार हैं  -- संपादक )