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प्रो. नाज़ क़ादरी उर्दू के बड़े साहित्यकार व आलोचक थे ।


बिहार यूनिवर्सिटी, मुज़फ़्फ़रपुर के पूर्व विभाग अध्यक्ष उर्दू प्रो. नाज़ का़दरी बिहार के बड़े साहित्यकार व आलोचक थे , उन की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उन्होंने 35 वर्षों तक उर्दू साहित्य पढा़या और एक से बढ़कर एक होनहार शागिर्द बनाए जो देश और देश से बाहर बिहार का नाम रौशन कर रहे हैं । इन विचारों का उल्लेख ” उर्दू बिरादरी ” की और से आयोजित एक प्रोग्राम में साहित्य कारों , पत्रकारों और समाज सेवी संस्थाओं से जुड़े लोगों ने किया जो प्रो. नाज़ का़दरी के निधन के बाद रखी गई थी। विचार रखने वालों में डा.अबदुल वासे, डॉ. बिस्मिल आरिफ़ी, ज़फ़र अनवर, डॉ. हैदर अली, जलालुद्दीन असलम, रहमतुल्लाह फा़रूकी़ , क़द्र शहसवानी, क़ादिर आरज़ू देयोरवी , मोहम्मद वसीम, राशिदुल इसलाम, असरार कुरेशी, सादेक़ीन कुरेशी प्रमुख हैं  ।

मालूम हो कि पिछले दो वर्षों से वो बीमार थे और 13 नवंबर को उनका निधन हो गया था । प्रो. नाज़ का़दरी के बेटे व ” बज़्म ए सदफ़ इंटरनेशनल ”  के चेयरमैन शहाबुद्दीन अहमद जो क़तर में रहते हैं, उर्दू का चराग़ पूरी दुनिया में जलाने का जज़्बा लेकर आगे बढ़ रहे है ।