Sunday, January 26, 2020
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सीएए के विरुद्ध प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री का गुमराह कहना, स्वतंत्रता सेनानी का अपमान ।

भारत के लोग शुरू से ही जागरूक रहे हैं। ये वही लोग हैं जिनके पूर्वजों ने भारत को आजाद कराया। अंग्रेजों के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी और बड़े युद्ध बाद देश आजाद हुआ था। उनकी की पीढ़ी से ही जुड़े लोग अपने देश को बचाने और संविधान की रक्षा के लिए एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। जिसे देश के प्रधानमंत्री गुमराह,नासमझ कह रहे हैं और ये भी कह रहे हैं कि इन को क़ानून की जानकारी नहीं है। भारत के लोगों के लिए, प्रधान का ये कहना कि कुछ लोग इन्हें बहका रहे हैं, सभी स्वतंत्रता सेनानी का अपमान है। वो लोगों का मजाक उडा़ रहे हैं और उन लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं जिन के वोट से वो प्रधानमंत्री बने हुए हैं। ये विचार आल इंडिया मिल्ली काउंसिल महासचिव डॉ. मोहम्मद मंजूर आलम ने व्यक्त किए।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि भारत के लोग सचेत हैं, समझदार हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि ये एक धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन विवादास्पद नागरिकता कानून इस धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र का विरोध करता है और संविधान के खिलाफ कानून बनाया गया है, इसलिए वे सड़कों पर निकले हैं। भारत के लोग को बधाई के पात्र हैं जो एक महीने से सड़कों पर अपने अधिकारों की रक्षा, देश की रक्षा और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, गंगा जमूनी सभ्यता का परिचय देते हुए धर्म,जा़त और समाज के नाम पर बांटने वालों को नाकाम बना रहे हैं।  लोगों का जुनून, विरोध और संघर्ष सराहनीय है, स्थिति को समझना प्रधानमंत्री और पूरी सरकार की जिम्मेदारी है। वो लोगों की बात सुने और देश के संविधान के खिलाफ बनाया गया क़ानून कानून वापस ले ।

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