Wednesday, November 20, 2019
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हम सब्र करें । जजों ने टाइटल सूट को बुनियाद बनाने के बजाय सुलह समझौता करने की कोशिश की है : मिल्ली काउंसिल

डॉ मोहम्मद मंज़ूर आलम

9 नवंबर (प्रेस विज्ञप्ति) सर्वोच्च न्यायालय भारत का सबसे बड़ा न्यायालय है। हमने हमेशा इसका सम्मान किया है, हम बाबरी मस्जिद – राम मंदिर विवाद के संबंध में किए गए निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि न्यायाधीशों ने निर्णय लिखते समय तथ्यों को ध्यान में नहीं रखा है और विशेष रूप से टाइटल सूट को बुनियाद नहीं बनाया है । इन विचारों को आल इंडिया मिल्ली काउंसिल के महासचिव डॉ. मोहम्मद मंजूर आलम ने व्यक्त किया ।

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, डॉ। मुहम्मद मंज़ूर आलम ने ये भी कहा कि जो निर्णय आया वो किसी की हार औरजीत का नहीं है, सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को संतुष्ट करने का प्रयास किया है। हालाँकि, निर्णय को देखते हुए, ऐसा लगता है कि न्यायाधीशों ने लंबे विवाद को समाप्त करने और फैसले के माध्यम से शांति बनाने की कोशिश की है, लेकिन कुछ सवाल भी हैं जब उन्होंने स्वीकार किया है कि मस्जिद को राम मंदिर तोड़ कर नहीं बनाया गया है । यह भी स्वीकार किया है कि मूर्ति को 22/23 दिसंबर 1949 की रात को वहां रखा गया था, जब वहाँ नमाज़ हो रही थी , ये भी कहा कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस एक असंवैधानिक प्रक्रिया थी, फिर किस आधार पर उन्होंने मंदिर के निर्माण के लिए पूरी जमीन दी।

डॉ. मुहम्मद मंज़ूर आलम ने ये भी कहा कि मुसलमान शुरू से कहते आ रहे हैं कि जो भी फैसला आएगा, हम उसे स्वीकार करेंगे। इस लिए उचित यही है कि हम सब्र से काम लें , मुमकिन है हमारे लिए इस में कोई खै़र का पहलू हो। कानून और व्यवस्था बनाए रखना सरकार का कर्तव्य है और यह अपील देश के सभी लोगों से की जानी चाहिए। डॉ. मोहम्मद मंज़ूर आलम ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम को जो पांच एकड़ ज़मीन देने की बात कही है , वो 67 एकड़ ज़मीन में से दी जाए , जिसे सरकार ने 1993 में अधिग्रहण किया था , यही सभी के लिए मुनासिब होगा और इस प्रकार शांति बरक़रार रहेगी ।

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